रायपुर: सूदखोरी, रंगदारी, मारपीट और अवैध हथियार रखने के आरोपों में फरार चल रहा कुख्यात सूदखोर वीरेंद्र सिंह तोमर उर्फ रूबी सिंह तोमर आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया है। रायपुर पुलिस ने शनिवार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में घेराबंदी कर वीरेंद्र तोमर को धर दबोचा है
हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र तोमर गिरफ्तार (History Sheeter Virendra Tomar Arrest) बता दें वीरेंद्र सिंह तोमर (Virendra Singh Tomar Arrest) बीते 151 दिनों से फरार था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम आरोपी को सड़क मार्ग से रायपुर ला रही है। मामले में उसका भाई रोहित तोमर अब भी फरार है।जानकारी के अनुसार, वीरेंद्र सिंह उर्फ रूबी तोमर एक आदतन अपराधी है, जो अपने छोटे भाई रोहित और अन्य परिवारजनों के साथ मिलकर सूदखोरी का काम करता है। आरोपी कर्ज देने के बाद मूलधन से कई गुना अधिक ब्याज वसूलता था और भुगतान न करने पर मारपीट व धमकी देता था। उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में आधा दर्जन से अधिक केस दर्ज हैं, जिनमें उगाही, चाकूबाजी, ब्लैकमेलिंग और आर्म्स एक्ट शामिल हैं।(Tomar Brothers Case Raipur)
पांच महीने पहले प्रॉपर्टी डीलर दशमीत चावला ने तेलीबांधा थाने में रोहित तोमर के खिलाफ मारपीट और धमकी की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद रोहित फरार हो गया। रोहित को बचाने के लिए रूबी तोमर ने भी गायब होना शुरू कर दिया। पुलिस जब वीरेंद्र के घर पहुंची तो वहां से अवैध हथियार बरामद हुए, जिसके बाद उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट का केस दर्ज किया गया था। वहीं फरार रोहित तोमर की तलाश जारी है।
रायपुर – छत्तीसगढ़ की अस्मिता और जनभावनाओं के प्रतीक “छत्तीसगढ़ महतारी” की मूर्ति तोड़े जाने की घटना ने पूरे प्रदेश में उबाल ला दिया है, इस अपमानजनक कृत्य के विरोध में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने राज्यभर में बंद और विरोध आंदोलन का आह्वान किया, जिसके बाद प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में हड़कंप मच गया । सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद लोगों में इतना आक्रोश था कि शासन को डर था कहीं आंदोलन उग्र न हो जाए। परिणामस्वरूप राज्य शासन ने तत्काल छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति पुनः स्थापित करवाकर जनता के गुस्से को शांत करने का प्रयास किया । अज्ञात तत्वों ने तोड़ी महतारी की मूर्ति जानकारी के अनुसार, घटना VIP चौक रायपुर की है, जहाँ कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों ने रात के समय छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया ।
सुबह जब लोगों ने देखा कि प्रतिमा टूटी पड़ी है, तो आसपास के क्षेत्र में भारी रोष और दुख की लहर फैल गई । स्थानीय नागरिकों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी, परंतु कई घंटे तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण जनता और सामाजिक संगठनों में गहरा असंतोष फैल गया ।
छत्तीसगढ़ महतारी राज्य की पहचान है, जिसे “धरती माता, संस्कृति की जननी, और छत्तीसगढ़ की आत्मा” के रूप में पूजा जाता है । इसलिए इस घटना को लोगों ने राज्य की अस्मिता पर हमला माना ।
क्रांति सेना की सक्रियता प्रदेश बंद का ऐलान घटना की सूचना मिलते ही छत्तीसगढ़ क्रांति सेना, जो लंबे समय से छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान के लिए संघर्षरत संगठन के रूप में जाना जाता है, मैदान में उतर गई । क्रांति सेना के प्रमुख नेताओं ने प्रेसवार्ता करते हुए कहा “यह छत्तीसगढ़ की आत्मा पर चोट है । जब तक दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता और महतारी की मूर्ति पुनः स्थापित नहीं होती, तब तक राज्य बंद रहेगा ।” इस ऐलान के बाद प्रदेशभर में समर्थन की लहर दौड़ पड़ी । सैकड़ों सामाजिक संगठन, युवाजन समूह और आम नागरिक आंदोलन से जुड़ गए ।
सोशल मीडिया पर #जयमहतारी और #छत्तीसगढ़महतारी_हमर_गौरव ट्रेंड करने लगे ।
सरकार की बेचैनी प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा क्रांति सेना के बंद की घोषणा के बाद सरकार और प्रशासन में हड़कंप मच गया । प्रदेश के प्रमुख शहरों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, बालोद, कोरिया, कोरबा और महासमुंद में पुलिस बलों की भारी तैनाती की गई । आंतरिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि किसी भी कीमत पर आंदोलन को फैलने न दिया जाए । इसी बीच जनता के दबाव को देखते हुए शासन ने कुछ ही घंटों में महतारी की मूर्ति पुनः स्थापित कर दी ।
हालाँकि, लोगों ने इसे “जनशक्ति की जीत” और “सरकार की मजबूरी” बताया।
आंदोलनकारियों पर कार्यवाही गिरफ्तारियां और नजरबंदी- बंद के आह्वान से एक दिन पहले ही रात को कई जिलों में क्रांति सेना के प्रमुख पदाधिकारियों और समर्थकों को नजरबंद कर लिया गया । अभनपुर, दुर्ग, रायपुर, धमतरी और राजनांदगांव में पुलिस ने देर रात छापेमारी कर क्रांति सेना से जुड़े कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया ।
रायपुर से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ कार्यकर्ताओं को रात 2 बजे पुलिस ने घरों से उठाया, जिससे परिवारों में दहशत फैल गई । आरोप है कि शासन ने आंदोलन को रोकने के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किया ।
क्रांति सेना के प्रवक्ता ने कहा-“हमने लोकतांत्रिक तरीके से बंद का आह्वान किया था, लेकिन सरकार ने हमें अपराधियों की तरह व्यवहार किया । यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति और संविधान दोनों का अपमान है ।” जनता का समर्थन और सड़कों पर नाराजगी बंद के दिन सुबह से ही राज्य के कई शहरों में दुकाने बंद रहीं । लोगों ने स्वयं आगे आकर सड़कों पर उतरकर शांति पूर्ण रैलियाँ और नारेबाजी की “महतारी हमर अस्मिता हे” और “जय छत्तीसगढ़ महतारी” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा । कई जिलों में महिलाएँ भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं किसी भी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं मिली, जिससे यह आंदोलन पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण रहा । विपक्ष और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया-विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यवाही को लोकतंत्र के खिलाफ बताया – उनका कहना है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने और जनता की भावनाओं से बचने के लिए क्रांतिकारी संगठनों को हाउस अरेस्ट कर रही है ।
राज्य के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविदों ने कहा -“छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति कोई राजनीतिक विषय नहीं, यह हमारी पहचान है। इसे लेकर जो भी अपमान हुआ है, वह पूरे प्रदेश का अपमान है ।”
सरकार का बचाव और जांच की घोषणा– सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा, हालाँकि, आंदोलनकारियों ने इस जांच को “राजनीतिक दिखावा” बताया है और कहा कि जब तक दोषियों को सजा और गिरफ्तार अधिकारीयों की पारदर्शी सूची जारी नहीं होती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे ।
“महतारी हमर अस्मिता हे” आंदोलन का नारा बना प्रतीक, अब यह नारा केवल विरोध का प्रतीक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना और स्वाभिमान का स्वर बन चुका है ।
राज्य के हर कोने से लोग इस घटना के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर रहे हैं ।
क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने कहा- “हम किसी सरकार या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ हैं जो छत्तीसगढ़ की अस्मिता का अपमान करती है। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, हमारा संघर्ष जारी रहेगा ।”
अस्मिता की रक्षा के लिए एकजुट हुआ छत्तीसगढ़ – छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है । जहाँ एक ओर सरकार पर दमन और भय का आरोप लग रहा है, वहीं दूसरी ओर जनता ने दिखा दिया कि महतारी के सम्मान के लिए पूरा प्रदेश एक स्वर में खड़ा है । यह घटना न केवल राजनीतिक या प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब अस्मिता पर चोट होती है, तब छत्तीसगढ़ की जनता मौन नहीं रहती, वह आंदोलन बन जाती है ।
रायपुर/अभनपुर – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जहाँ एक ओर राज्य महोत्सव की झिलमिल रोशनी, मंचों की चकाचौंध, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी राज्य में बेबस और मजबूर दिव्यांगजन आंदोलनकारी न्याय की गुहार लगाते हुए अभनपुर में नजरबंद कर दिए गए हैं ।
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दिव्यांगजनों के अनुसार, शासन उनकी आवाज़ को दबाने के लिए लगातार दमनकारी रवैया अपनाए हुए है ताकि उनकी बातें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तक न पहुँच सकें । 10 महीनों से चल रहा न्याय की मांग का आंदोलन राज्य के विभिन्न जिलों रायपुर, दुर्ग, बलौदा बाजार, बिलासपुर, राजनांदगांव और महासमुंद से आए दिव्यांगजन पिछले 10 महीनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं । उनकी मुख्य माँग है कि राज्य शासन के विभागों में ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जो फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर पदों पर कार्यरत हैं, उनकी जाँच की जाए और उन्हें तत्काल पदमुक्त किया जाए । आंदोलनकारियों का कहना है कि वास्तविक दिव्यांगजन वर्षों से उपेक्षित हैं । उन्हें न तो रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं और न ही शासन द्वारा घोषित दिव्यांग कल्याण योजनाओं का लाभ ।
आवाज़ को दबाने की कोशिश रात में होती है, पुलिस की कार्यवाही – आंदोलनरत दिव्यांगजन बताते हैं कि पुलिस प्रशासन द्वारा रात के समय 1 से 2 बजे के बीच आंदोलन स्थल पर पहुँचकर गाली-गलौज, मारपीट और धमकी दी जाती है । कई बार तो दिव्यांगजनों के हाथ से मोबाइल छीन लिए जाते हैं ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें ।
एक महिला दिव्यांग आंदोलनकारी ने बताया “हम धरने पर बैठे हैं, लेकिन हमें अपराधियों की तरह ट्रीट किया जा रहा है। रात में पुलिस आती है, डराती है, और कहती है कि अगर चुप नहीं रहे तो जेल में डाल देंगे ।” अभनपुर में नजरबंदी रायपुर तक नहीं पहुँचने दिया जा रहा, सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ दिनों से प्रशासन ने कई दिव्यांगजनों को अभनपुर इलाके में रोक कर नजरबंद कर दिया है ।
उनका कहना है कि उन्हें रायपुर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही, ताकि वे राज्य महोत्सव स्थल पर जाकर या प्रधानमंत्री के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त न कर सकें । आंदोलनकारियों ने बताया कि खाने-पीने की सुविधा बेहद सीमित है, कई दिव्यांगजनों को दवाइयाँ तक नहीं मिल पा रही हैं, और पुलिस चौकियों में कड़ी निगरानी में रखा गया है ।
“हम भी इस देश के नागरिक हैं” दिव्यांगजनों की पीड़ा
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अभनपुर में नजरबंद एक आंदोलनकारी ने कहा “हम भी इस देश के नागरिक हैं। हम संविधान में दिए गए समान अधिकार की बात कर रहे हैं। लेकिन हमें इस तरह नजरबंद कर दिया गया है जैसे हम देशद्रोही हों । हमारा अपराध सिर्फ इतना है कि हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई ।” उन्होंने आगे कहा “हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री जी तक हमारी आवाज़ पहुँचे । फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले अधिकारी असली दिव्यांगों का हक़ मार रहे हैं। हम भी सम्मान के साथ जीना चाहते हैं ।”
शासन का मौन प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल अब तक छत्तीसगढ़ शासन या पुलिस प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है, हालांकि अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, शासन को आशंका है कि आंदोलनकारी राज्य महोत्सव स्थल पर जाकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, जिसके चलते उन्हें रायपुर की सीमा के बाहर रोकने के निर्देश दिए गए हैं ।
मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया – राज्य के कई मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दिव्यांग कल्याण समितियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है ।
छत्तीसगढ़ राज्य मानवाधिकार आयोग से भी इस मामले में संज्ञान क्यू नहीं ले रहा एक सवाल हैं ?
“किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक दबाना लोकतंत्र पर धब्बा है । विशेषकर जब बात दिव्यांग नागरिकों की हो, तो यह और भी अमानवीय हो जाता है । शासन को तुरंत हस्तक्षेप कर दिव्यांगजनों की मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए ।”
संविधान और अधिकारों का सवाल – संविधान के अनुच्छेद 41, 46 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सरकार पर यह संवैधानिक दायित्व है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर, शिक्षा, और रोजगार प्रदान करे । लेकिन वर्तमान परिस्थितियाँ यह दर्शा रही हैं कि राज्य के दिव्यांग नागरिकों को न केवल उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है बल्कि उनकी आवाज़ तक दबाई जा रही है ।
आंदोलन जारी रहेगा – आंदोलनकारी दिव्यांगजनों का कहना है कि वे अब पीछे हटने वाले नहीं हैं । जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं
1. फर्जी प्रमाणपत्रधारियों की जांच, 2. दिव्यांग आयोग की सशक्त पुनर्संरचना, 3. रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, तब तक वे सत्याग्रह जारी रखेंगे ।
बिलासपुर – पत्रकारिता संरक्षण एवं पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक पर संसोधन पर संगोष्ठी के साथ छत्तीसगढ़ के आलावा अन्य राज्यों से आये पत्रकारों का सम्मान अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति छत्तीसगढ़ न्यायधानी बिलासपुर में 2 नवंबर की स्व लखीराम अग्रवाल ऑडिटोरियम में करने जा रहा हैं ।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष जिगनेश कालावाडिया (गुजरात ) की सहमति से छत्तीसगढ़ की इकाई को राष्ट्रीय अधिवेशन 2025 का जिम्मेदारी दी गईं जिसमे श्री जिग्नेश कालावाडिया ने कहाँ देश का पहला राज्य हैं जहां पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक बना हैं इसलिए ये राष्ट्रीय अधिवेशन रखा गया जिसमे देश के कई राज्यों के पत्रकार इस अधिवेशन में शामिल होंगे और अपने राज्यों की सरकार तक ये बात पहुंचाने का कार्य करेंगे की छत्तीसगढ़ की तरह उनके राज्यों में पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक लागू किया जाये जिससे पत्रकार स्वतंत्र रूप से पत्रकारिता कर सके । अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति भारत में छत्तीसगढ़ से तीन वरिष्ठ पत्रकार राष्ट्रीय कार्यकारिणी में हैं श्री राकेश प्रताप सिंह परिहार, श्री महफूज खान, श्री नितिन सिन्हा जैसे पत्रकारों ने छत्तीसगढ़ में लागू पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक को अधूरा बताया इसलिए इस अधिवेशन में पत्रकारिता संरक्षण के साथ सुरक्षा कानून विधेयक में संसोधन की बात हमारा संगठन कर रहा हैं और उसी पर इस अधिवेशन में चर्चा की जाएगी और विष्णु देव सरकार तक ये मैसेज भी भेजा जायेगा की इस विधेयक में छत्तीसगढ़ के पत्रकारों को क्या चाहिए और उसे इस विधेयक में संसोधन कर जोड़ा जाये ।
एबीपीएसएस के प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द शर्मा ने बताया की इस राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में हमारे बीच केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, विशिष्ठ अतिथि के रूप में बिलासपुर विधायक पूर्व केबिनेट मंत्री अमर अग्रवाल, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव शामिल होंगे जो हमारे और सरकार के बीच सेतु का कार्य करते हुए हम पत्रकारों की बात को सरकार तक पहुंचाने का कार्य करेंगे इसके अलावा दिल्ली से वरिष्ठ पत्रकार श्री सी पी जोशी,नागपुर से अविनाश काकड़े एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश के पत्रकार संगठनों के मुखिया प्रदेश अध्यक्षों और रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष, बिलासपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष को भी इस अधिवेशन में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया हैं जो हमारे बीच पत्रकारिता संरक्षण और सुरक्षा कानून विधेयक पर इस संगोष्ठी पर चर्चा करेंगे इसके अलावा अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति छत्तीसगढ़ इकाई के हजारों पत्रकार प्रदेश के कोने कोने से इस अधिवेशन में शामिल होंगे ।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति छत्तीसगढ़ के प्रदेश एवं जिला पदाधिकारियों ने संगठन से जुड़े सभी पत्रकारों से अपील की हैं इस अधिवेशन में अधिक संख्या में पहुंच कर सरकार तक बात पहुंचाने का कार्य करें और सुरक्षा कानून विधेयक संसोधन बिल लाने के लिए अपील करें जिससे हमें स्वतंत्र रूप से पत्रकारिता करने की आजादी मिल सके ।
गोविन्द शर्मा (प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़)अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति
उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल ने मनाई अपनी तीसरी वर्षगांठ — सेवा, संवेदना और विश्वास का सफर जारीरायपुर, 29 अक्टूबर 2025।उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल, रायपुर ने आज अपनी स्थापना की तीसरी वर्षगांठ बड़े उत्साह और भावनात्मक माहौल में मनाई। पिछले तीन वर्षों में इस संस्थान ने चिकित्सा सेवा, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।समारोह का आयोजन हॉस्पिटल परिसर में भव्य रूप से किया गया, जिसमें वरिष्ठ चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, प्रशासनिक अधिकारी, मरीजों के परिजन और अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ।मेडिकल डायरेक्टर, डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा, “तीन वर्षों की यह यात्रा हमारे सभी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और मरीजों के विश्वास से प्रेरित रही है। हमने हर दिन ‘क्वालिटी हेल्थकेयर विथ कम्पैशन को अपना मंत्र माना है। ICU, कार्डियक केयर, प्रसूति विभाग, और इमरजेंसी यूनिट में हमने लगातार तकनीकी और मानवीय सुधार किए हैं।”प्रबंध निदेशक श्रीमती नम्रता सिंह ने अस्पताल की यात्रा को याद करते हुए कहा,“उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल का निर्माण सिर्फ एक इमारत के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदना के रूप में हुआ है। तीन वर्षों की इस यात्रा में हमने हर वर्ग के लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने का प्रयास किया है। हमारी प्राथमिकता हमेशा से ‘मरीज केंद्रित देखभाल और ‘मानवीय स्पर्श रही है।”उन्होंने आगे कहा कि आने वाले वर्ष में अस्पताल अपने विस्तार के साथ-साथ उच्च तकनीकी सेवाओं की शुरुआत करने जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को और सही ईलाज़ मिल सकेगा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय मिल सकेगी।सम्मान एवं भविष्य की योजनाएँ:समारोह के दौरान उन डॉक्टरों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने अस्पताल की प्रगति में विशेष योगदान दिया। इस अवसर पर केक काटकर वर्षगांठ का उत्सव मनाया गया।समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। पूरे आयोजन का माहौल उत्साह, कृतज्ञता और गर्व से भरा हुआ था — जो उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल की टीम भावना और मरीजों के प्रति समर्पण को प्रदर्शित करता है।