
रायपुर/अभनपुर – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जहाँ एक ओर राज्य महोत्सव की झिलमिल रोशनी, मंचों की चकाचौंध, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी राज्य में बेबस और मजबूर दिव्यांगजन आंदोलनकारी न्याय की गुहार लगाते हुए अभनपुर में नजरबंद कर दिए गए हैं ।

दिव्यांगजनों के अनुसार, शासन उनकी आवाज़ को दबाने के लिए लगातार दमनकारी रवैया अपनाए हुए है ताकि उनकी बातें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तक न पहुँच सकें । 10 महीनों से चल रहा न्याय की मांग का आंदोलन राज्य के विभिन्न जिलों रायपुर, दुर्ग, बलौदा बाजार, बिलासपुर, राजनांदगांव और महासमुंद से आए दिव्यांगजन पिछले 10 महीनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं । उनकी मुख्य माँग है कि राज्य शासन के विभागों में ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जो फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर पदों पर कार्यरत हैं, उनकी जाँच की जाए और उन्हें तत्काल पदमुक्त किया जाए । आंदोलनकारियों का कहना है कि वास्तविक दिव्यांगजन वर्षों से उपेक्षित हैं । उन्हें न तो रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं और न ही शासन द्वारा घोषित दिव्यांग कल्याण योजनाओं का लाभ ।
आवाज़ को दबाने की कोशिश रात में होती है, पुलिस की कार्यवाही – आंदोलनरत दिव्यांगजन बताते हैं कि पुलिस प्रशासन द्वारा रात के समय 1 से 2 बजे के बीच आंदोलन स्थल पर पहुँचकर गाली-गलौज, मारपीट और धमकी दी जाती है । कई बार तो दिव्यांगजनों के हाथ से मोबाइल छीन लिए जाते हैं ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें ।
एक महिला दिव्यांग आंदोलनकारी ने बताया “हम धरने पर बैठे हैं, लेकिन हमें अपराधियों की तरह ट्रीट किया जा रहा है। रात में पुलिस आती है, डराती है, और कहती है कि अगर चुप नहीं रहे तो जेल में डाल देंगे ।” अभनपुर में नजरबंदी रायपुर तक नहीं पहुँचने दिया जा रहा, सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ दिनों से प्रशासन ने कई दिव्यांगजनों को अभनपुर इलाके में रोक कर नजरबंद कर दिया है ।
उनका कहना है कि उन्हें रायपुर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही, ताकि वे राज्य महोत्सव स्थल पर जाकर या प्रधानमंत्री के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त न कर सकें । आंदोलनकारियों ने बताया कि खाने-पीने की सुविधा बेहद सीमित है, कई दिव्यांगजनों को दवाइयाँ तक नहीं मिल पा रही हैं, और पुलिस चौकियों में कड़ी निगरानी में रखा गया है ।
“हम भी इस देश के नागरिक हैं” दिव्यांगजनों की पीड़ा

अभनपुर में नजरबंद एक आंदोलनकारी ने कहा “हम भी इस देश के नागरिक हैं। हम संविधान में दिए गए समान अधिकार की बात कर रहे हैं। लेकिन हमें इस तरह नजरबंद कर दिया गया है जैसे हम देशद्रोही हों । हमारा अपराध सिर्फ इतना है कि हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई ।” उन्होंने आगे कहा “हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री जी तक हमारी आवाज़ पहुँचे । फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले अधिकारी असली दिव्यांगों का हक़ मार रहे हैं। हम भी सम्मान के साथ जीना चाहते हैं ।”
शासन का मौन प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल अब तक छत्तीसगढ़ शासन या पुलिस प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है, हालांकि अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, शासन को आशंका है कि आंदोलनकारी राज्य महोत्सव स्थल पर जाकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, जिसके चलते उन्हें रायपुर की सीमा के बाहर रोकने के निर्देश दिए गए हैं ।
मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया – राज्य के कई मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दिव्यांग कल्याण समितियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है ।
छत्तीसगढ़ राज्य मानवाधिकार आयोग से भी इस मामले में संज्ञान क्यू नहीं ले रहा एक सवाल हैं ?
“किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक दबाना लोकतंत्र पर धब्बा है । विशेषकर जब बात दिव्यांग नागरिकों की हो, तो यह और भी अमानवीय हो जाता है । शासन को तुरंत हस्तक्षेप कर दिव्यांगजनों की मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए ।”
संविधान और अधिकारों का सवाल – संविधान के अनुच्छेद 41, 46 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सरकार पर यह संवैधानिक दायित्व है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर, शिक्षा, और रोजगार प्रदान करे । लेकिन वर्तमान परिस्थितियाँ यह दर्शा रही हैं कि राज्य के दिव्यांग नागरिकों को न केवल उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है बल्कि उनकी आवाज़ तक दबाई जा रही है ।
आंदोलन जारी रहेगा – आंदोलनकारी दिव्यांगजनों का कहना है कि वे अब पीछे हटने वाले नहीं हैं । जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं
1. फर्जी प्रमाणपत्रधारियों की जांच, 2. दिव्यांग आयोग की सशक्त पुनर्संरचना, 3. रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, तब तक वे सत्याग्रह जारी रखेंगे ।
संवाददाता: विशेष प्रतिनिधि








