शराब घोटाला मामला : अनवर ढेबर के खिलाफ FIR और गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, कोर्ट ने EOW को जारी किया नोटिस

बिलासपुर। शराब घोटाला मामले में ACB-EOW में दर्ज एफआईआर और गिरफ्तारी के खिलाफ कारोबारी अनवर ढेबर ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है. इस याचिका पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा है.प्रदेश में कथित शराब घोटाले को लेकर पूर्व में ईडी की तरफ से प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में ईडी ने कारोबारी अनवर ढेबर, छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड के एमडी रहे अरुणपति त्रिपाठी, नितेश पुरोहित और त्रिलोक सिंह ढिल्लन को आरोपी बताते हुए गिरफ्तार किया था. ढेबर को पूर्व में हाईकोर्ट से मेडिकल ग्राउंड पर जमानत मिल गई थी. बाद में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इसी मामले में ईओडब्ल्यू में मामला दर्ज करवाया है. इस मामले में ढेबर को महाराष्ट्र जाने के दौरान गिरफ्तार किया गया था. उनकी तरफ से हाईकोर्ट में लगाई याचिका में कहा गया है कि पूर्व में इस मामले में दर्ज ईसीआईआर को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था, इसलिए एफआईआर और गिरफ्तारी अवैध है.

आदिवासी युवक की हत्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता व कांग्रेस का हाथ पिता ने लगाया गंभीर आरोप

रायपुर ब्रेकिंग न्यूज /  आदिवासी युवक की हत्या को आत्महत्या का रूप देने के मामले में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का हाथ होना व हत्या करना बताया गया ,मालूम हो कि विगत वर्ष अप्रैल 2023 को 17 साल के आदिवासी नाबालिग लड़के की लाश एक पेड़ से लटकता हुआ मिलता है जिसे शिकायत/ सूचना पर बस्तर के नरहरपुर अंतर्गत मासूलपानी पुलिस लाश बरामद करती है जिसे आत्महत्या समझ मामले को बंद कर दिया जाता है जबकि पीड़ित पिता द्वारा बार-बार कहते आ रहे हैं कि मेरे बेटे को मारकर आत्महत्या का रूप दिया जा रहा है पुलिस ने पीड़ित पिता की एक नहीं सुनी ,  पीड़ित पिता न्याय पाने दर- दर भटकता रहा आज पीड़ित पिता गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के रायपुर संभाग अध्यक्ष फरीद कुरैशी को ज्ञापन सौंपकर अपने पुत्र की हत्या को लेकर न्याय दिलाने की मांग की गई पीड़ित पिता ने बताया कि मेरे पुत्र कि हत्या में सक्रिय कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का हाथ है इन्होंने ने ही मेरे पुत्र कि हत्या की है और कांग्रेस शासनकाल में कांग्रेस का संरक्षण पाते हुए हत्या को आत्महत्या दिखाते हुए हत्या के मामले को पुलिस ने गंभीरता से नहीं ली है ज्ञात हो कि नरहरपुर थानांतर्गत मासूलपानी में विगत वर्ष आदिवासी युवक 17 वर्षीय खिलेश्वर कोडोपी पिता अशोक कोडोपी की लाश गांव के पास पेड़ पर संदेहास्पद स्थिति में लटकती मिली जिसे आत्महत्या क़रार दिया गया जबकि पिता अशोक कोडोपी बेटे की हत्या करना बता रहे हैं पिता का कहना है कि मेरे बेटे की लटकती शव को देखकर नहीं लग रहा कि मेरे बेटे ने आत्महत्या की है लटकती पेड़ पर शव के नीचे पड़े  हुए पत्थरों पर बेटे के दोनों पैर टिके हुए हैं उस स्थिति में कोई भी कैसे आत्महत्या कर सकता है साथ ही मेरे बेटे का मोबाइल फोन व पैर में पहने चप्पल घटनास्थल से आधा  किलोमीटर दूर एक सप्ताह बाद मिलता है पिता ने यह भी बताया कि लटकती हुई लाश पर जो कपड़े पहने हुए हैं वह मृतक का नहीं है पीड़ित पिता ने बताया कि आत्महत्या नहीं है बल्कि सोची समझी रणनीति पूर्वक की गई हत्या हैं गांव के ही सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ता दुर्गेश मंडावी व अन्य के द्वारा मेरे पुत्र कि हत्या की गई है  जिसे भरपूर प्रयास कर आत्महत्या का रूप दिया गया है ।
पीड़ित पिता ने कहा कि न्याय पाने के लिए पुलिस प्रशासन के डी आई जी कांकेर,एस डी एम कांकेर, जिला कलेक्टर कांकेर, थाना प्रभारी नरहरपुर कांकेर, अनुविभागीय अधिकारी कांकेर, उ,ब, कांकेर छ ग मे कई आवेदन प्रस्तुत किए जाने के पश्चात आज दिनांक तक न्याय नहीं मिल रहा है तथा न्याय पाने दर दर भटक रहे हैं कुछ दिनों पहले पीड़ित पिता ने राजधानी हलचल टीम को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा था कि जल्द ही मेरे पुत्र कि हत्या करने वाले व संरक्षण देने वालों की मिडिया / शासन प्रशासन/ जनता के समक्ष खुलासा किया जाऐगा,आज गोंडवाना गणतंत्र पार्टी संभाग अध्यक्ष को मांग पत्र सौंप पुत्र कि हत्या में शामिल आरोपी व आरोपीयों को संरक्षण देने वालो का खुलासा किया गया पीड़ित पिता ने खुलासा करते हुए कहा कि मेरे पुत्र कि हत्या में सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ता दुर्गेश मंडावी व अन्य लोग शामिल हैं तथा इन आरोपीयों को बचाने में कांग्रेसियों का हाथ है इसलिए मेरे पुत्र कि हत्या में शामिल आरोपी को कांग्रेस शासनकाल के दबाव में पुलिस द्वारा बचाया गया है। पीड़ित पिता व परिजनों ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से न्याय दिलाऐ जाने की मांग रखी है संभाग अध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि आपको न्याय जरूर मिलेगी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी हर स्तर पर न्याय दिलाने संघर्षरत रहेंगी।
राजधानी हलचल टीम ने इस मामले को लेकर पूर्व में प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया है।
 राजधानी हलचल टीम को पीड़ित पिता के द्वारा दिए जा रहे कथन व साक्ष्य तथा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के समक्ष मांग पत्र में आरोपीयों व संरक्षण देने वालों का खुलासा किए जाने पर  यह प्रतीत होता नजर आ रहा है कि कि पीड़ित पिता द्वारा लगाए जा रहे आरोप की सत्यता पर मुहर लग रहीं है।
 अगर मान लिया जाए कि पीड़ित पिता की सारे आरोप बेबुनियाद है तो फिर पुलिस द्वारा जांच में कमी कैसे पाई जा रही है आरोपीयों से पूछताछ क्यों नहीं किया गया जांच के दौरान गंभीरता क्यों नहीं दिखाई गई जैसे मृतक की लाश से कुछ आधा किलोमीटर दूर पर मृतक का चप्पल पाया जाता है ठीक एक सप्ताह बाद मृतक का मोबाइल फोन पाया जाता है  पुलिस द्वारा गंभीरता से जांच करती व आरोपीयों से कड़ाई से पूछताछ करती तो शायद आज न्याय की दिशा कुछ और होती पीड़ित पिता को न्याय पाने दर-दर भटकना नहीं पड़ता, नरहरपुर – कांकेर पुलिस के कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहें हैं। न्याय पाने की आश में व भाजपा शासन में न्याय दिलाने को लेकर पीड़ित पिता ने गृहमंत्री के समक्ष शिकायत आवेदन प्रस्तुत कर न्याय की गुहार लगाई है देखना यह बाकी है कि क्या पीड़ित पिता को न्याय मिल पायेगी,आरोपी पुलिस गिरफ्त में नजर आएंगे या फिर आरोपी बच निकलने में कामयाब होंगे।

भानुप्रतापपुर SDO, TI प्रेमप्रकाश पुलिस बल द्वारा बलात घर घुसकर गुंडा-गर्दी करते हुये रात 10 बजे 50 वर्षीय दसमत साहू को उठाकर ले गये |

भानुप्रतापपुर SDO, TI प्रेमप्रकाश पुलिस बल द्वारा बलात घर घुसकर रात 10 बजे 50 वर्षीय दसमत साहू को उठाकर ले गये ।

भानुप्रतापपुर ।
घटना दिनांक 24.02.2024 को रात्रि 9.45 बजे एसडीओपी सिविल ड्रेस में और टी.आई प्रेमप्रकाश अवधिया, पुलिस बल के साथ देवपुरी रायपुर स्थित घर में बिना सूचना किसी नोटिस, बिना किसी सुचना दिये बलात घर में घुस आये और पूरे परिवार को अश्लील उराधाकार प्रताडित किया गालीगलौज धक्का मुक्की करते हुये एक कमरे में बंद कर दिया क्या तथा घर की विधवा मुखिया दशमत बाई साहू को उठाकर ले गये, जिसकी सूचना टिकरापारा थाना वालों को भी नहीं दी गई । पुलिस बर्बरता यही नहीं रूकी, तीसरे दिन हाईकोर्ट में पेश कर दिये जहां उच्च न्यायालय की फटकार पर मजबूरी में 26.02.2024 को दशमत को छोडना पडा । इसके बाद भी पुलिस वालों ने घर वाले को एक तुरन्त नोटिस बनाकर उसकी फोटोकापी थमाकर जबरन परिवार के सभी सदस्यों से अपने पेपर में हस्ताक्षर करवा लिये और दूसरे दिन थाने में फिर से बुलवाया गया । दशमत और दशमत के परिवार वाले इन पुलिस बनाम डाकुओं से इतना सहम गये है उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे क्या करें । यही नहीं पुलिस वालों ने धमकी भी दिया है कि उन्हें फिर थाना ले जायेंगे। क्योंकि इन्हें नहीं पता कि पुलिस वाले इन्हें इस तरह आधी रात क्यों उठाकर ले गये, फिर थाना ले जाने की धमकी क्यों दिये। क्या पुलिस भी सुपाड़ी लेना शुरू कर दी है कि किसी के कहने पर अपने ड्रेस में कुछ भी कर सकते है। जिस पर दशमत के परिवार वालों ने पुलिस महानिदेशक और शासन प्रशासन को आवेदन लगाई है। इन्हें पता चला है कि भानुप्रतापुर वाले दशमत के घर के पडोस में एक मुस्लिम परिवार की लडकी भाग गई है इसी प्रकरण में तोहमत लगाने के लिये इनके कहने पर दशमत के बेटे उम्र लगभग 23 साल के 3 साल पहले लापता हो गये जिस पर आरोप थोपकर इस मामले को तूल देने की कोशिश और हिन्दु मुस्लिम रंग देने की कोशिश की जा रही है । दशमत और उसके परिवार ने शासन प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस मामले पर तुरन्त कार्यवाही करे और दशमत के परिवार को न्याय दिलाये ।

आधार फाइनेंस द्वारा तहसीलदार का फर्जी पत्र बनकर अपराधिकृत को दिया गया अनजाम ।।

आधार फाइनेंस लिमिटेड रायपुर के द्वारा अपराधिकृत कर तहसीलदार का फर्जी आदेश पत्र बनवाकर सबसे पहले भिलाई-3 दुर्ग थाने में उसकी पावती ली गई उसके बाद आधार फाइनेंस के अधिवक्ता के द्वारा उस पत्र को लेकर पीड़िता संगीता बर्मन के घर पर रखे हुए सामान को अवैध रूप से अपराधी गतिविधि कर घर का दरवाजा तोड़कर सामान को चोरी कर ले जाने की कोशिश की जा रही थी, जिसमें कुछ पुलिस वाले भी शामिल थे यह पूरी घटना DDनगर कॉलोनी चरोदा भिलाई की एक महिला देख रही थी, जिन्होंने मौके पर जाकर वीडियो बनाने की कोशिश की तो उन महिला को चार आदमियों ने पड़कर घर के अंदर खींच लिया एवं महिला के साथ बदतमीजी की कोशिश की गई जिसे वहा खड़े पुलिस वाले प्रत्यक्ष देख रहे थे । पुलिस वालों ने कुछ नहीं किया जब महिला ने संगीता बर्मन को कॉल करके बुलाया तो उसके बाद जब संगीता बर्मन आ गई उन्होंने वीडियो बनाना जारी रखा क्योंकि संगीता बर्मन एक अभियान कर्ज मुक्त भारत से जुड़ी हुई है, इस कारण उन्हें कुछ नियम एवं कानून बताए गए हैं, जिनका वह पालन करते हुए वीडियो बना रही थी, पुलिस वालों ने जब देखा कि उनका वीडियो बन रहा है, क्योंकि जो आदेश पत्र फर्जी था पुलिस वाले को पता था इसलिए पुलिस वाले वहां से निकाल कर भाग गए, इसके बाद आधार फाइनेंस लिमिटेड रायपुर(बैंक) वालों ने संगीता बर्मन एवं उनकी महिला मित्र और एक पुरुष को घर पर बंधक बनाकर रखा । कर्ज मुक्त भारत अभियान की टीम मौके पर पहुंची उसके बाद उन्होंने 112 में कॉल किया जिसमें पुलिस वाले नहीं आ रहे थे, बाद में अधिवक्ता रमन मिश्रा के द्वारा दुर्ग SP साहब को शिकायत कर 112 को कॉल किया तब 112 की गाड़ी आई एवं उनके द्वारा आधार फाइनेंस लिमिटेड रायपुर(बैंक) कर्मी को बुलाया गया जिन्होंने अपने हाथ से ताला को खोल दोनों बंधक महिलाओं को बाहर निकाला एवं खुद से स्वीकार किया कि उनके द्वारा दोनों महिलाओं को एवं उसे व्यक्ति को बंधक बनाया गया था । जिसमें की आधार फाइनेंस लिमिटेड रायपुर(बैंक) के अधिवक्ता भी शामिल थे, बाद में जब कंप्लेंट लिखने के लिए संगीता बर्मन एवं उनकी महिला मित्र थाने गई तो पुलिस द्वारा केवल शिकायत लिया गया FIR नहीं लिखा गया । …………………………………………………

गलवान के बाद चीन ने मान लिया कि भारत अब कमजोर देश नहीं: राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि चीन भले ही भारत को अपना दुश्मन मानता हो, लेकिन नई दिल्ली हर देश के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों में विश्वास रखता है। यूनाइटेड किंगडम की यात्रा पर गए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत बदल गया है और यहां तक ​​कि चीन जैसे देश, जो भारत को एक कमजोर अर्थव्यवस्था मानते थे, ने भी भारत के बारे में अपनी धारणा बदल दी है। नई दिल्ली। ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के प्रति चीन की धारणा काफी बदल गई है। सिंह ने यह भी कहा कि गलवान गतिरोध के बाद चीन ने मान लिया कि भारत अब कमजोर राष्ट्र नहीं है. “चीन को भारत का प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। हम चीन को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं मानते हैं, शायद चीन ऐसा मानता है। हालांकि, हम अपने सभी पड़ोसियों और दुनिया भर के देशों के साथ अच्छे संबंध बनाना चाहते हैं…2020 में, एक आमना-सामना सिंह ने कहा, “भारत और चीन के बीच जो हुआ, और हमारे सुरक्षा बलों ने जो बहादुरी दिखाई, शायद यही कारण है कि चीन का भारत के बारे में नजरिया बदल गया है। उन्हें एहसास हो गया है कि भारत अब कमजोर नहीं है।”चीनी राज्य-नियंत्रित ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक हालिया लेख का हवाला देते हुए, सिंह ने कहा, “ग्लोबल टाइम्स के एक स्तंभकार, जो एक तरह से चीन का मुखपत्र है, ने ‘भारत कथा के बारे में मैं क्या देखता हूं’ शीर्षक के साथ एक लेख प्रकाशित किया भारत में।’ आर्थिक खिलाड़ी और एक रणनीतिक शक्ति।” लंदन में इंडिया हाउस में सामुदायिक स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि चीनी विश्लेषक ने यह भी कहा कि बीजिंग अब स्वीकार करता है कि आप भारत को पसंद करें या नहीं, भारत की छवि और बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

रायपुर का कुख्यात सूदखोर वीरेंद्र तोमर गिरफ्तार, ग्वालियर में घेराबंदी कर दबोचा, आज लाया जाएगा रायपुर

रायपुर: सूदखोरी, रंगदारी, मारपीट और अवैध हथियार रखने के आरोपों में फरार चल रहा कुख्यात सूदखोर वीरेंद्र सिंह तोमर उर्फ रूबी सिंह तोमर आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया है। रायपुर पुलिस ने शनिवार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में घेराबंदी कर वीरेंद्र तोमर को धर दबोचा है

हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र तोमर गिरफ्तार (History Sheeter Virendra Tomar Arrest) बता दें वीरेंद्र सिंह तोमर (Virendra Singh Tomar Arrest) बीते 151 दिनों से फरार था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम आरोपी को सड़क मार्ग से रायपुर ला रही है। मामले में उसका भाई रोहित तोमर अब भी फरार है।जानकारी के अनुसार, वीरेंद्र सिंह उर्फ रूबी तोमर एक आदतन अपराधी है, जो अपने छोटे भाई रोहित और अन्य परिवारजनों के साथ मिलकर सूदखोरी का काम करता है। आरोपी कर्ज देने के बाद मूलधन से कई गुना अधिक ब्याज वसूलता था और भुगतान न करने पर मारपीट व धमकी देता था। उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में आधा दर्जन से अधिक केस दर्ज हैं, जिनमें उगाही, चाकूबाजी, ब्लैकमेलिंग और आर्म्स एक्ट शामिल हैं।(Tomar Brothers Case Raipur)

पांच महीने पहले प्रॉपर्टी डीलर दशमीत चावला ने तेलीबांधा थाने में रोहित तोमर के खिलाफ मारपीट और धमकी की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद रोहित फरार हो गया। रोहित को बचाने के लिए रूबी तोमर ने भी गायब होना शुरू कर दिया। पुलिस जब वीरेंद्र के घर पहुंची तो वहां से अवैध हथियार बरामद हुए, जिसके बाद उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट का केस दर्ज किया गया था। वहीं फरार रोहित तोमर की तलाश जारी है।

छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने से भड़का जनआक्रोश, क्रांति सेना के बंद आह्वान से डरी सरकार, आंदोलनकारियों को किया गया नजरबंद।

रायपुर – छत्तीसगढ़ की अस्मिता और जनभावनाओं के प्रतीक “छत्तीसगढ़ महतारी” की मूर्ति तोड़े जाने की घटना ने पूरे प्रदेश में उबाल ला दिया है, इस अपमानजनक कृत्य के विरोध में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने राज्यभर में बंद और विरोध आंदोलन का आह्वान किया, जिसके बाद प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में हड़कंप मच गया । सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद लोगों में इतना आक्रोश था कि शासन को डर था कहीं आंदोलन उग्र न हो जाए। परिणामस्वरूप राज्य शासन ने तत्काल छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति पुनः स्थापित करवाकर जनता के गुस्से को शांत करने का प्रयास किया । अज्ञात तत्वों ने तोड़ी महतारी की मूर्ति जानकारी के अनुसार, घटना VIP चौक रायपुर की है, जहाँ कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों ने रात के समय छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया ।

सुबह जब लोगों ने देखा कि प्रतिमा टूटी पड़ी है, तो आसपास के क्षेत्र में भारी रोष और दुख की लहर फैल गई । स्थानीय नागरिकों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी, परंतु कई घंटे तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण जनता और सामाजिक संगठनों में गहरा असंतोष फैल गया ।

छत्तीसगढ़ महतारी राज्य की पहचान है, जिसे “धरती माता, संस्कृति की जननी, और छत्तीसगढ़ की आत्मा” के रूप में पूजा जाता है । इसलिए इस घटना को लोगों ने राज्य की अस्मिता पर हमला माना ।

क्रांति सेना की सक्रियता प्रदेश बंद का ऐलान घटना की सूचना मिलते ही छत्तीसगढ़ क्रांति सेना, जो लंबे समय से छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान के लिए संघर्षरत संगठन के रूप में जाना जाता है, मैदान में उतर गई । क्रांति सेना के प्रमुख नेताओं ने प्रेसवार्ता करते हुए कहा “यह छत्तीसगढ़ की आत्मा पर चोट है । जब तक दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता और महतारी की मूर्ति पुनः स्थापित नहीं होती, तब तक राज्य बंद रहेगा ।” इस ऐलान के बाद प्रदेशभर में समर्थन की लहर दौड़ पड़ी । सैकड़ों सामाजिक संगठन, युवाजन समूह और आम नागरिक आंदोलन से जुड़ गए ।

सोशल मीडिया पर #जयमहतारी और #छत्तीसगढ़महतारी_हमर_गौरव ट्रेंड करने लगे ।

सरकार की बेचैनी प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा क्रांति सेना के बंद की घोषणा के बाद सरकार और प्रशासन में हड़कंप मच गया । प्रदेश के प्रमुख शहरों  रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, बालोद, कोरिया, कोरबा और महासमुंद में पुलिस बलों की भारी तैनाती की गई । आंतरिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि किसी भी कीमत पर आंदोलन को फैलने न दिया जाए । इसी बीच जनता के दबाव को देखते हुए शासन ने कुछ ही घंटों में महतारी की मूर्ति पुनः स्थापित कर दी ।

हालाँकि, लोगों ने इसे “जनशक्ति की जीत” और “सरकार की मजबूरी” बताया।

आंदोलनकारियों पर कार्यवाही गिरफ्तारियां और नजरबंदी- बंद के आह्वान से एक दिन पहले ही रात को कई जिलों में क्रांति सेना के प्रमुख पदाधिकारियों और समर्थकों को नजरबंद कर लिया गया । अभनपुर, दुर्ग, रायपुर, धमतरी और राजनांदगांव में पुलिस ने देर रात छापेमारी कर क्रांति सेना से जुड़े कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया ।

रायपुर से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ कार्यकर्ताओं को रात 2 बजे पुलिस ने घरों से उठाया, जिससे परिवारों में दहशत फैल गई । आरोप है कि शासन ने आंदोलन को रोकने के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किया ।

क्रांति सेना के प्रवक्ता ने कहा- “हमने लोकतांत्रिक तरीके से बंद का आह्वान किया था, लेकिन सरकार ने हमें अपराधियों की तरह व्यवहार किया । यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति और संविधान दोनों का अपमान है ।” जनता का समर्थन और सड़कों पर नाराजगी बंद के दिन सुबह से ही राज्य के कई शहरों में दुकाने बंद रहीं । लोगों ने स्वयं आगे आकर सड़कों पर उतरकर शांति पूर्ण रैलियाँ और नारेबाजी की “महतारी हमर अस्मिता हे” और “जय छत्तीसगढ़ महतारी” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा । कई जिलों में महिलाएँ भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं किसी भी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं मिली, जिससे यह आंदोलन पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण रहा । विपक्ष और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया-विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यवाही को लोकतंत्र के खिलाफ बताया – उनका कहना है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने और जनता की भावनाओं से बचने के लिए क्रांतिकारी संगठनों को हाउस अरेस्ट कर रही है ।

राज्य के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविदों ने कहा -“छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति कोई राजनीतिक विषय नहीं, यह हमारी पहचान है। इसे लेकर जो भी अपमान हुआ है, वह पूरे प्रदेश का अपमान है ।”

सरकार का बचाव और जांच की घोषणा– सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा, हालाँकि, आंदोलनकारियों ने इस जांच को “राजनीतिक दिखावा” बताया है और कहा कि जब तक दोषियों को सजा और गिरफ्तार अधिकारीयों की पारदर्शी सूची जारी नहीं होती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे ।

“महतारी हमर अस्मिता हे” आंदोलन का नारा बना प्रतीक, अब यह नारा केवल विरोध का प्रतीक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना और स्वाभिमान का स्वर बन चुका है ।

राज्य के हर कोने से लोग इस घटना के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर रहे हैं ।

क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने कहा- “हम किसी सरकार या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ हैं जो छत्तीसगढ़ की अस्मिता का अपमान करती है। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, हमारा संघर्ष जारी रहेगा ।”

अस्मिता की रक्षा के लिए एकजुट हुआ छत्तीसगढ़ – छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है । जहाँ एक ओर सरकार पर दमन और भय का आरोप लग रहा है, वहीं दूसरी ओर जनता ने दिखा दिया कि महतारी के सम्मान के लिए पूरा प्रदेश एक स्वर में खड़ा है । यह घटना न केवल राजनीतिक या प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब अस्मिता पर चोट होती है, तब छत्तीसगढ़ की जनता मौन नहीं रहती, वह आंदोलन बन जाती है ।

संवाददाता: विशेष प्रतिनिधि-  संगीता बर्मन

स्थान: रायपुर/अभनपुर/दुर्ग/राजनांदगांव

राज्य महोत्सव की चमक के पीछे छिपा अंधेरा, अभनपुर में नजरबंद दिव्यांगजन आंदोलनकारियों की आवाज़ दबाने के आरोप से हिला छत्तीसगढ़ ।

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रायपुर/अभनपुर – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जहाँ एक ओर राज्य महोत्सव की झिलमिल रोशनी, मंचों की चकाचौंध, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उत्साह देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी राज्य में बेबस और मजबूर दिव्यांगजन आंदोलनकारी न्याय की गुहार लगाते हुए अभनपुर में नजरबंद कर दिए गए हैं ।

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दिव्यांगजनों के अनुसार, शासन उनकी आवाज़ को दबाने के लिए लगातार दमनकारी रवैया अपनाए हुए है ताकि उनकी बातें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तक न पहुँच सकें । 10 महीनों से चल रहा न्याय की मांग का आंदोलन राज्य के विभिन्न जिलों रायपुर, दुर्ग, बलौदा बाजार, बिलासपुर, राजनांदगांव और महासमुंद से आए दिव्यांगजन पिछले 10 महीनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं ।  उनकी मुख्य माँग है कि राज्य शासन के विभागों में ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जो फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर पदों पर कार्यरत हैं, उनकी जाँच की जाए और उन्हें तत्काल पदमुक्त किया जाए । आंदोलनकारियों का कहना है कि वास्तविक दिव्यांगजन वर्षों से उपेक्षित हैं । उन्हें न तो रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं और न ही शासन द्वारा घोषित दिव्यांग कल्याण योजनाओं का लाभ ।

आवाज़ को दबाने की कोशिश रात में होती है, पुलिस की कार्यवाही – आंदोलनरत दिव्यांगजन बताते हैं कि पुलिस प्रशासन द्वारा रात के समय 1 से 2 बजे के बीच आंदोलन स्थल पर पहुँचकर गाली-गलौज, मारपीट और धमकी दी जाती है । कई बार तो दिव्यांगजनों के हाथ से मोबाइल छीन लिए जाते हैं ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें ।

एक महिला दिव्यांग आंदोलनकारी ने बताया “हम धरने पर बैठे हैं, लेकिन हमें अपराधियों की तरह ट्रीट किया जा रहा है। रात में पुलिस आती है, डराती है, और कहती है कि अगर चुप नहीं रहे तो जेल में डाल देंगे ।” अभनपुर में नजरबंदी रायपुर तक नहीं पहुँचने दिया जा रहा, सूत्रों के अनुसार, बीते कुछ दिनों से प्रशासन ने कई दिव्यांगजनों को अभनपुर इलाके में रोक कर नजरबंद कर दिया है ।

उनका कहना है कि उन्हें रायपुर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही, ताकि वे राज्य महोत्सव स्थल पर जाकर या प्रधानमंत्री के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त न कर सकें । आंदोलनकारियों ने बताया कि खाने-पीने की सुविधा बेहद सीमित है, कई दिव्यांगजनों को दवाइयाँ तक नहीं मिल पा रही हैं, और पुलिस चौकियों में कड़ी निगरानी में रखा गया है ।

“हम भी इस देश के नागरिक हैं” दिव्यांगजनों की पीड़ा

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अभनपुर में नजरबंद एक आंदोलनकारी ने कहा “हम भी इस देश के नागरिक हैं। हम संविधान में दिए गए समान अधिकार की बात कर रहे हैं। लेकिन हमें इस तरह नजरबंद कर दिया गया है जैसे हम देशद्रोही हों । हमारा अपराध सिर्फ इतना है कि हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाई ।” उन्होंने आगे कहा “हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री जी तक हमारी आवाज़ पहुँचे । फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले अधिकारी असली दिव्यांगों का हक़ मार रहे हैं। हम भी सम्मान के साथ जीना चाहते हैं ।”

शासन का मौन प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल अब तक छत्तीसगढ़ शासन या पुलिस प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है, हालांकि अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, शासन को आशंका है कि आंदोलनकारी राज्य महोत्सव स्थल पर जाकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, जिसके चलते उन्हें रायपुर की सीमा के बाहर रोकने के निर्देश दिए गए हैं ।

मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया – राज्य के कई मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दिव्यांग कल्याण समितियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है ।

“किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक दबाना लोकतंत्र पर धब्बा है । विशेषकर जब बात दिव्यांग नागरिकों की हो, तो यह और भी अमानवीय हो जाता है । शासन को तुरंत हस्तक्षेप कर दिव्यांगजनों की मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए ।”

संविधान और अधिकारों का सवाल – संविधान के अनुच्छेद 41, 46 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सरकार पर यह संवैधानिक दायित्व है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर, शिक्षा, और रोजगार प्रदान करे । लेकिन वर्तमान परिस्थितियाँ यह दर्शा रही हैं कि राज्य के दिव्यांग नागरिकों को न केवल उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है बल्कि उनकी आवाज़ तक दबाई जा रही है ।

आंदोलन जारी रहेगा – आंदोलनकारी दिव्यांगजनों का कहना है कि वे अब पीछे हटने वाले नहीं हैं । जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं

संवाददाता: विशेष प्रतिनिधि

2 नवंबर को अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति बैठक पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक में संसोधन एवं पत्रकारिता संरक्षण, अन्य राज्यों से आये पत्रकारों किया जाएगा सम्मानित ।

बिलासपुर – पत्रकारिता संरक्षण एवं पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक पर संसोधन पर संगोष्ठी के साथ छत्तीसगढ़ के आलावा अन्य राज्यों से आये पत्रकारों का सम्मान अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति छत्तीसगढ़ न्यायधानी बिलासपुर में 2 नवंबर की स्व लखीराम अग्रवाल ऑडिटोरियम में करने जा रहा हैं ।

उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल, रायपुर ने आज अपनी स्थापना की तीसरी वर्षगांठ बड़े उत्साह और भावनात्मक माहौल में मनाई

उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल ने मनाई अपनी तीसरी वर्षगांठ — सेवा, संवेदना और विश्वास का सफर जारीरायपुर, 29 अक्टूबर 2025।उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल, रायपुर ने आज अपनी स्थापना की तीसरी वर्षगांठ बड़े उत्साह और भावनात्मक माहौल में मनाई। पिछले तीन वर्षों में इस संस्थान ने चिकित्सा सेवा, मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।समारोह का आयोजन हॉस्पिटल परिसर में भव्य रूप से किया गया, जिसमें वरिष्ठ चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, प्रशासनिक अधिकारी, मरीजों के परिजन और अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ।मेडिकल डायरेक्टर, डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा, “तीन वर्षों की यह यात्रा हमारे सभी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और मरीजों के विश्वास से प्रेरित रही है। हमने हर दिन ‘क्वालिटी हेल्थकेयर विथ कम्पैशन को अपना मंत्र माना है। ICU, कार्डियक केयर, प्रसूति विभाग, और इमरजेंसी यूनिट में हमने लगातार तकनीकी और मानवीय सुधार किए हैं।”प्रबंध निदेशक श्रीमती नम्रता सिंह ने अस्पताल की यात्रा को याद करते हुए कहा,“उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल का निर्माण सिर्फ एक इमारत के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदना के रूप में हुआ है। तीन वर्षों की इस यात्रा में हमने हर वर्ग के लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने का प्रयास किया है। हमारी प्राथमिकता हमेशा से ‘मरीज केंद्रित देखभाल और ‘मानवीय स्पर्श रही है।”उन्होंने आगे कहा कि आने वाले वर्ष में अस्पताल अपने विस्तार के साथ-साथ उच्च तकनीकी सेवाओं की शुरुआत करने जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को और सही ईलाज़ मिल सकेगा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय मिल सकेगी।सम्मान एवं भविष्य की योजनाएँ:समारोह के दौरान उन डॉक्टरों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने अस्पताल की प्रगति में विशेष योगदान दिया। इस अवसर पर केक काटकर वर्षगांठ का उत्सव मनाया गया।समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। पूरे आयोजन का माहौल उत्साह, कृतज्ञता और गर्व से भरा हुआ था — जो उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल की टीम भावना और मरीजों के प्रति समर्पण को प्रदर्शित करता है।