छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने से भड़का जनआक्रोश, क्रांति सेना के बंद आह्वान से डरी सरकार, आंदोलनकारियों को किया गया नजरबंद।

रायपुर – छत्तीसगढ़ की अस्मिता और जनभावनाओं के प्रतीक “छत्तीसगढ़ महतारी” की मूर्ति तोड़े जाने की घटना ने पूरे प्रदेश में उबाल ला दिया है, इस अपमानजनक कृत्य के विरोध में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने राज्यभर में बंद और विरोध आंदोलन का आह्वान किया, जिसके बाद प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में हड़कंप मच गया । सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद लोगों में इतना आक्रोश था कि शासन को डर था कहीं आंदोलन उग्र न हो जाए। परिणामस्वरूप राज्य शासन ने तत्काल छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति पुनः स्थापित करवाकर जनता के गुस्से को शांत करने का प्रयास किया । अज्ञात तत्वों ने तोड़ी महतारी की मूर्ति जानकारी के अनुसार, घटना VIP चौक रायपुर की है, जहाँ कुछ अज्ञात असामाजिक तत्वों ने रात के समय छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया ।

सुबह जब लोगों ने देखा कि प्रतिमा टूटी पड़ी है, तो आसपास के क्षेत्र में भारी रोष और दुख की लहर फैल गई । स्थानीय नागरिकों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी, परंतु कई घंटे तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण जनता और सामाजिक संगठनों में गहरा असंतोष फैल गया ।

छत्तीसगढ़ महतारी राज्य की पहचान है, जिसे “धरती माता, संस्कृति की जननी, और छत्तीसगढ़ की आत्मा” के रूप में पूजा जाता है । इसलिए इस घटना को लोगों ने राज्य की अस्मिता पर हमला माना ।

क्रांति सेना की सक्रियता प्रदेश बंद का ऐलान घटना की सूचना मिलते ही छत्तीसगढ़ क्रांति सेना, जो लंबे समय से छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान के लिए संघर्षरत संगठन के रूप में जाना जाता है, मैदान में उतर गई । क्रांति सेना के प्रमुख नेताओं ने प्रेसवार्ता करते हुए कहा “यह छत्तीसगढ़ की आत्मा पर चोट है । जब तक दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता और महतारी की मूर्ति पुनः स्थापित नहीं होती, तब तक राज्य बंद रहेगा ।” इस ऐलान के बाद प्रदेशभर में समर्थन की लहर दौड़ पड़ी । सैकड़ों सामाजिक संगठन, युवाजन समूह और आम नागरिक आंदोलन से जुड़ गए ।

सोशल मीडिया पर #जयमहतारी और #छत्तीसगढ़महतारी_हमर_गौरव ट्रेंड करने लगे ।

सरकार की बेचैनी प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा क्रांति सेना के बंद की घोषणा के बाद सरकार और प्रशासन में हड़कंप मच गया । प्रदेश के प्रमुख शहरों  रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, बालोद, कोरिया, कोरबा और महासमुंद में पुलिस बलों की भारी तैनाती की गई । आंतरिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि किसी भी कीमत पर आंदोलन को फैलने न दिया जाए । इसी बीच जनता के दबाव को देखते हुए शासन ने कुछ ही घंटों में महतारी की मूर्ति पुनः स्थापित कर दी ।

हालाँकि, लोगों ने इसे “जनशक्ति की जीत” और “सरकार की मजबूरी” बताया।

आंदोलनकारियों पर कार्यवाही गिरफ्तारियां और नजरबंदी- बंद के आह्वान से एक दिन पहले ही रात को कई जिलों में क्रांति सेना के प्रमुख पदाधिकारियों और समर्थकों को नजरबंद कर लिया गया । अभनपुर, दुर्ग, रायपुर, धमतरी और राजनांदगांव में पुलिस ने देर रात छापेमारी कर क्रांति सेना से जुड़े कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया ।

रायपुर से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ कार्यकर्ताओं को रात 2 बजे पुलिस ने घरों से उठाया, जिससे परिवारों में दहशत फैल गई । आरोप है कि शासन ने आंदोलन को रोकने के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किया ।

क्रांति सेना के प्रवक्ता ने कहा- “हमने लोकतांत्रिक तरीके से बंद का आह्वान किया था, लेकिन सरकार ने हमें अपराधियों की तरह व्यवहार किया । यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति और संविधान दोनों का अपमान है ।” जनता का समर्थन और सड़कों पर नाराजगी बंद के दिन सुबह से ही राज्य के कई शहरों में दुकाने बंद रहीं । लोगों ने स्वयं आगे आकर सड़कों पर उतरकर शांति पूर्ण रैलियाँ और नारेबाजी की “महतारी हमर अस्मिता हे” और “जय छत्तीसगढ़ महतारी” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा । कई जिलों में महिलाएँ भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं किसी भी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं मिली, जिससे यह आंदोलन पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण रहा । विपक्ष और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया-विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यवाही को लोकतंत्र के खिलाफ बताया – उनका कहना है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने और जनता की भावनाओं से बचने के लिए क्रांतिकारी संगठनों को हाउस अरेस्ट कर रही है ।

राज्य के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविदों ने कहा -“छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति कोई राजनीतिक विषय नहीं, यह हमारी पहचान है। इसे लेकर जो भी अपमान हुआ है, वह पूरे प्रदेश का अपमान है ।”

सरकार का बचाव और जांच की घोषणा– सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा, हालाँकि, आंदोलनकारियों ने इस जांच को “राजनीतिक दिखावा” बताया है और कहा कि जब तक दोषियों को सजा और गिरफ्तार अधिकारीयों की पारदर्शी सूची जारी नहीं होती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे ।

“महतारी हमर अस्मिता हे” आंदोलन का नारा बना प्रतीक, अब यह नारा केवल विरोध का प्रतीक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना और स्वाभिमान का स्वर बन चुका है ।

राज्य के हर कोने से लोग इस घटना के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर रहे हैं ।

क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने कहा- “हम किसी सरकार या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ हैं जो छत्तीसगढ़ की अस्मिता का अपमान करती है। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, हमारा संघर्ष जारी रहेगा ।”

अस्मिता की रक्षा के लिए एकजुट हुआ छत्तीसगढ़ – छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है । जहाँ एक ओर सरकार पर दमन और भय का आरोप लग रहा है, वहीं दूसरी ओर जनता ने दिखा दिया कि महतारी के सम्मान के लिए पूरा प्रदेश एक स्वर में खड़ा है । यह घटना न केवल राजनीतिक या प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब अस्मिता पर चोट होती है, तब छत्तीसगढ़ की जनता मौन नहीं रहती, वह आंदोलन बन जाती है ।

संवाददाता: विशेष प्रतिनिधि-  संगीता बर्मन

स्थान: रायपुर/अभनपुर/दुर्ग/राजनांदगांव

2 नवंबर को अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति बैठक पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक में संसोधन एवं पत्रकारिता संरक्षण, अन्य राज्यों से आये पत्रकारों किया जाएगा सम्मानित ।

बिलासपुर – पत्रकारिता संरक्षण एवं पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक पर संसोधन पर संगोष्ठी के साथ छत्तीसगढ़ के आलावा अन्य राज्यों से आये पत्रकारों का सम्मान अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति छत्तीसगढ़ न्यायधानी बिलासपुर में 2 नवंबर की स्व लखीराम अग्रवाल ऑडिटोरियम में करने जा रहा हैं ।

क्राइम ब्रांच का जवान सस्पेंड, रायपुर पुलिस में मचा हड़कंप, जब रक्षक ही बन जाते है भक्षक

राजधानी रायपुर की क्राइम ब्रांच पर गंभीर आरोप लगे हैं। दुर्ग के एक बिजनेसमैन मयंक गोस्वामी ने आरोप लगाया है कि क्राइम ब्रांच के पांच अधिकारियों ने चेकिंग के दौरान उनकी कार से ₹2 लाख कैश चुरा लिए। बिजनेसमैन ने मामले की शिकायत दुर्ग SSP से की, जिसके बाद दुर्ग पुलिस ने शिकायत रायपुर SSP को फॉरवर्ड कर दी।घटना के बाद रायपुर SSP ने क्राइम ब्रांच के कांस्टेबल प्रशांत शुक्ला (Prashant Shukla) को सस्पेंड कर दिया और दूसरे संदिग्धों की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, रायपुर क्राइम ब्रांच की टीम को एक संदिग्ध कार के बारे में जानकारी मिली थी। टीम ने कुम्हारी होते हुए कार का पीछा किया और दुर्ग के पद्मनाभपुर इलाके में पहुंच गई। संदिग्ध कार पुलिस को चकमा दे गई, लेकिन टीम वहीं रुक गई और बिजनेसमैन के घर पहुंच गई। (constable suspended)

बिजनेसमैन मयंक गोस्वामी ने बताया कि वह धमतरी से दुर्ग अपने घर लौटा ही था कि तभी पुलिस की एक गाड़ी उसके पीछे आकर रुकी। टीम ने बिना किसी वॉर्निंग के उसे कार से बाहर निकाला और उसकी तलाशी लेने लगी। टीम में प्रशांत शुक्ला, धनंजय गोस्वामी, प्रमोद वट्टी और अमित समेत पांच कांस्टेबल थे।

constable suspended: बिजनेसमैन ने दुर्ग पुलिस (Chhattisgarh Police) को CCTV फुटेज भी दी है, जिसमें कांस्टेबल प्रशांत शुक्ला को कथित तौर पर कार के पास देखा जा सकता है। बिजनेसमैन का आरोप है कि इस दौरान कार में रखे दो लाख रुपये चोरी हो गए। दुर्ग पुलिस ने रायपुर SSP को रिपोर्ट भेज दी है। इस बीच, इस घटना से रायपुर पुलिस डिपार्टमेंट में हड़कंप मच गया है। जांच चल रही है, और दूसरे पुलिस अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है।

कर्बला तालाब में 15वें वित्त आयोग की राशि से कोटा स्टोन, टाइल्स एवं शेड निर्माण पर रोक की मांग

रायपुर : कर्बला तालाब में 15वें वित्त आयोग की राशी से कोटा स्टोन, टाइल्स एवं शेड निर्माण कार्य रोक की मांग रायपुर, 17 अक्टूबर 2025:रायपुर-गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अध्यक्ष फरीद स्मारक ने कर्बला तालाब में 15वें वित्त आयोग की राशी से कोटा स्टोन, टाइल्स एवं शेड निर्माण कार्य की मांग की है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड अथॉरिटी ने पहले ही दिनांक 30.09.2025 को कलेक्टर रायपुर और नगर निगम को निर्देशित किया था कि तालाब क्षेत्र में किसी भी प्रकार के विकास का आह्वान किया जाए और वेटलैंड नियम, 2017 का पालन किया जाए। इसके बावजूद, नगर निगम रायपुर के उपमंडल द्वारा घोषित रूप से बताया गया कि 15वें वित्त आयोग की राशि का कर कोटा स्टोन, 15वें वित्त आयोग के कार्यकारी उपाध्यक्ष हैं। जांच में पाया गया कि कंक्रीट बेस लगाए जा रहे हैं और स्पॉट में शेड के लिए बोल्ट भी लगाए जा रहे हैं। एडाकेट फरीद ने कहा कि यह कार्य 15 वें वित्त आयोग की संरचना और वेटलैंड नियम, 2017 का उल्लंघन है। उन्होंने कलेक्टर, नगर निगम और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण से आग्रह किया कि इस पर तुरंत रोक लगाई जाए, जांच की जाए और पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। आम नागरिकों से भी अपील है कि वे पर्यावरण और सार्वजनिक हित की सुरक्षा के लिए बने रहें और इस मामले में प्रशासन द्वारा निर्णय की निगरानी करें।

हरेली पर्व पर नीम व गुलमोहर का पौधारोपण,अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन वाय.डी.सी.

जामुल, भिलाई | छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्यौहार हरेली के पावन अवसर पर आज अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन वाय.डी.सी. तथा तर्पण मुक्तिधाम पर्यावरण सेवा संरक्षण परिषद के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी पहल की गई।

कार्यक्रम के अंतर्गत जामुल मुक्तिधाम मार्ग स्थित ढऊर तालाब पार क्षेत्र में नीम एवं गुलमोहर के पौधे रोपे गए। इन पौधों की सुरक्षा हेतु एक अभिनव विचार को साकार करते हुए मृतकों को मुक्तिधाम तक लाने के लिए उपयोग में लाई गई बांस की अर्थियों से ट्री गार्ड तैयार कर लगाए गए, जिससे पौधों को सुरक्षित वातावरण मिल सके और वे वृक्ष के रूप में विकसित हो सकें।

इस मौके पर संस्था के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से श्री बंशी साहू, विष्णु सिन्हा, ओमप्रकाश साहू, शत्रुघ्न साहू, संतोष चौरसिया, नूतन वर्मा, डॉ. सुखराम साहू, धर्मेंद्र वर्मा, हेमराम साहू, कृष्णा यादव और कैलाश निर्मलकर शामिल थे।

संस्था के डायरेक्टर एवं प्रदेशाध्यक्ष श्री सरस बर्मन ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ महतारी को नमन करते हुए प्रदेश में हरियाली और समृद्धि की कामना के साथ आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ परंपराओं के सम्मान को भी इस पहल से जोड़ा गया है, जो एक प्रेरणास्पद कदम है।

मानव अधिकारों के संरक्षण, युवाओं के विकास, पर्यावरण सुरक्षा, शिक्षा, सामाजिक न्याय और जनजागरूकता अभियानों के लिए कार्य करता है।

👉 YDC का उद्देश्य:

  1. मानव अधिकारों की रक्षा और उनके उल्लंघन के विरुद्ध आवाज उठाना।
  2. युवाओं को सशक्त बनाना – शिक्षा, नेतृत्व विकास और सामाजिक कार्यों के माध्यम से।
  3. पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए वृक्षारोपण, स्वच्छता और हरियाली अभियान।
  4. नशामुक्ति, बाल विवाह, लैंगिक समानता जैसे सामाजिक मुद्दों पर जनजागरूकता फैलाना।
  5. पीड़ितों को कानूनी सहायता और परामर्श देना।

👉 YDC की प्रमुख गतिविधियाँ:

  • मानवाधिकार विषयों पर कार्यशालाएँ और सेमिनार
  • पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण अभियान
  • गरीब और वंचित वर्ग के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और सहायता कार्यक्रम
  • महिला और बाल अधिकारों के लिए प्रचार-प्रसार

👉 संगठन की विशेषताएं:

  • गैर-राजनीतिक और गैर-लाभकारी संगठन
  • युवा नेतृत्व पर आधारित ढांचा
  • स्थानीय, राष्ट्रीय और कभी-कभी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक सहभागिता